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अनवर सुहैल की एक कविता

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नफरतों से पैदा नहीं होगा इन्किलाब लेना-देना नहीं कुछ नफरत का किसी इन्कलाब से नफरत की कोख से कोई इन्कलाब  होगा नहीं पैदा मेरे दोस्त ताने, व्यंग्य, लानतें और गालियाँ पत्थर, खंज़र, गोला-बारूद या कत्लो-गारत यही तो हैं फसलें नफरत की खेती की... तुम सोचते हो कि नफरत के कारोबार से जो भीड़ इकट्ठी हो रही है इससे होगी कभी प्रेम की बरसा ? बार-बार लुटकर भी खुश रह सके ये ताकत रहती है प्रेम के हिस्से में नफरत तो तोडती है दिल लूटती है अमन-चैन अवाम का... प्रेम जिसकी दरकार सभी को है इस प्रेम-विरोधी समय में इस अमन-विरोधी समय में इस अपमानजनक समय में नफरत की बातें करके जनांदोलन खड़ा करने का दिवा-स्वप्न देखने वालों को सिर्फ आगाह ही कर सकता है कवि कि कविता जोड़ती है दिलों को और नफरत तोड़ती है रिश्तों के अनुबंध नफरत से भड़कती है बदले की आग इस आग में सब कुछ जल जाना है फिर प्रेम और अमन के पंछी उड़ नहीं पायेंगे नफरत की लपटों और धुंए में कभी भी ये हमारा रास्ता हो नहीं सकता मुद्दतों की पीड़ा सहने की विरासत अपमान, तिरस्कार और मृत्यु की विरासत हमारी ताकत बन सकती है दोस्त इस ताकत के बल पर हम बदल देंगे दृश्य ए...

मौसम ऐसे ही बदलता है

सुखद यह है कि कल-आज कमी दर्ज किया है मैंने, मेरे लिए तुम्हारी बेचैनी में मैं मान ले रहा हूँ कि तुम्हें भी अब अहसास होने लगा है अपनी नादानियों का | .... मौसम ऐसे ही बदलता है .... तुम्हारा कवि ......

लोकतंत्र बीमार है

मिमिक्री मत करना कभी अब जेलों में अब भी जगह बहुत है पुलिस दुरुस्त हैं बस, बीमार है लोकतंत्र ! पुस्तक मेले में आके देखो बाबाओं के स्टाल पर दस रुपये की मोटी किताब है सेवक-सेविकाएँ एकदम चुस्त हैं बाउंसर सजग है बस लोकतंत्र बीमार है पता नहीं क्या बकता है ये साला गायेन पागल है ! - तुम्हारा कवि क्या लिखता है मत पढ़ो, सब कचरा है | उनका पढ़ो सब मौलिक, महान हैं |

मेरे दर्द को तुमने कविता बना दिया

दरअसल मैंने दर्द लिखा हर बार जिसे तुमने मान लिया कविता | मेरे दर्द को  तुमने कविता बना दिया ! -तुम्हारा कवि

हमारे प्रेम ने एक कर दिया धर्म पर लड़ने वालों को

क्रूरता अपने चरम पर है और सत्ता शामिल है क्रूरता के इस चक्रव्यू में ऐसे हम दोनों मग्न हैं प्रेम में जल्द ही ज़ारी किये जाएँगे फ़तवे हमारे खिलाफ़ खाप इंतज़ार में था हमारे प्रेम के लिए बहुत दिनों से खाली पड़ी थी उनकी बैठक और हम गर्व महसूस कर रहे हैं अपने प्रेम पर देखो, बर्दस्त नहीं उन्हें हमारी ख़ुशी पंडित और मौलाना हाथ मिला रहे हैं हमारी मौत की साजिस में उनकी साज़िस में शामिल हैं हमारे अपने भी हमारा प्रेम ही उनकी एकता है और इसलिए मैं खुश हूँ कि हमारे प्रेम ने एक कर दिया धर्म पर लड़ने वालों को और इसलिए अब मुझे भय नहीं लगता प्रेम में मरने से ...... यूँ ही ...तुम्हें सोचते हुए

तुम्हारे सब कुछ में कहीं मेरा नाम नहीं

तुम्हारा सब कुछ सिर्फ तुम्हारा है और तुम्हारे सब कुछ में कहीं मेरा नाम नहीं सब कुछ से अलग जो तुम हो वो मेरा है मैंने तुम्हें अपना माना यही मेरा अपराध है

शिक्षा और "मौत का निवाला"

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बिहार जैसे गरीब प्रान्त में शिक्षा का विकास हो या न हो , मध्याह्न भोजन जैसे योजना के तहत गरीब बच्चों को भोजन मिलने की गारंटी अवश्य मिली है | लेकिन इस भोजन के पीछे का सच बहुत भयावह है | इस योजना ने शिक्षकों को बेईमान से लेकर हत्यारा तक बना दिया है | मसरख, छपरा का मध्याह्न भोजन "मौत का निवाला" बनकर एक काला अध्याय गढ़ चुका है | गाहे-बगाहे भोजन में छिपकली , जहर , कीड़े-मकोड़े मिलने की खबर आती ही रही है | अधिकाँश ख़बरों को दबा दिया जाता है | स्कूल प्रांगन में तैयार हो रहे भोजन ने शिक्षकों पर एक अतिरिक्त बोझ डाल दिया है | अधिकांश हेड मास्टरों के घर में सरकारी चावल की बोरियां मिल जायेगी | आजकल सर्तक होकर ये बोरियां बाजार में धरल्ले से बेचीं जाती है | भोजन की गुणवत्ता इसी बात से पता लगाईं जा सकती है कि आये दिन इन भोजन के कारण सैकड़ों बच्चे बीमार हो रहे हैं | इस योजना के तहत नीचे-से-ऊपर तक लूट खसोट मचा हुआ है | भूख से तिलमिलाए बच्चे बेबस होकर इस अखाद्य भोजन को खाने के लिए मजबूर हैं | पिछले दिनों एक कार्यक्रम के सिलसिले में अपने गाँव गया हुआ था | मित्र रजनीकांत पाठक जी के साथ ही आना-जान...