Thursday, March 31, 2016

अनवर सुहैल की एक कविता


नफरतों से पैदा नहीं होगा इन्किलाब


लेना-देना नहीं कुछ
नफरत का किसी इन्कलाब से
नफरत की कोख से कोई इन्कलाब 
होगा नहीं पैदा मेरे दोस्त
ताने, व्यंग्य, लानतें और गालियाँ
पत्थर, खंज़र, गोला-बारूद या कत्लो-गारत
यही तो हैं फसलें नफरत की खेती की...
तुम सोचते हो कि नफरत के कारोबार से
जो भीड़ इकट्ठी हो रही है
इससे होगी कभी प्रेम की बरसा ?
बार-बार लुटकर भी खुश रह सके
ये ताकत रहती है प्रेम के हिस्से में
नफरत तो तोडती है दिल
लूटती है अमन-चैन अवाम का...
प्रेम जिसकी दरकार सभी को है
इस प्रेम-विरोधी समय में
इस अमन-विरोधी समय में
इस अपमानजनक समय में
नफरत की बातें करके
जनांदोलन खड़ा करने का
दिवा-स्वप्न देखने वालों को
सिर्फ आगाह ही कर सकता है कवि
कि कविता जोड़ती है दिलों को
और नफरत तोड़ती है रिश्तों के अनुबंध
नफरत से भड़कती है बदले की आग
इस आग में सब कुछ जल जाना है फिर
प्रेम और अमन के पंछी उड़ नहीं पायेंगे
नफरत की लपटों और धुंए में कभी भी
ये हमारा रास्ता हो नहीं सकता
मुद्दतों की पीड़ा सहने की विरासत
अपमान, तिरस्कार और मृत्यु की विरासत
हमारी ताकत बन सकती है दोस्त
इस ताकत के बल पर
हम बदल देंगे दृश्य एक दिन
ज़रूर एक दिन, देखना...



Thursday, January 14, 2016

मौसम ऐसे ही बदलता है

सुखद यह है
कि कल-आज
कमी दर्ज किया है
मैंने, मेरे लिए
तुम्हारी बेचैनी में
मैं मान ले रहा हूँ
कि तुम्हें भी अब अहसास होने लगा है
अपनी नादानियों का |
....
मौसम ऐसे ही बदलता है ....
तुम्हारा कवि ......

लोकतंत्र बीमार है

मिमिक्री मत करना कभी अब
जेलों में अब भी जगह बहुत है
पुलिस दुरुस्त हैं
बस, बीमार है
लोकतंत्र !
पुस्तक मेले में आके देखो
बाबाओं के स्टाल पर
दस रुपये की मोटी किताब है
सेवक-सेविकाएँ
एकदम चुस्त हैं
बाउंसर सजग है
बस लोकतंत्र बीमार है
पता नहीं क्या बकता है
ये साला गायेन पागल है !
- तुम्हारा कवि
क्या लिखता है
मत पढ़ो,
सब कचरा है |
उनका पढ़ो
सब मौलिक, महान हैं |

मेरे दर्द को तुमने कविता बना दिया

दरअसल मैंने
दर्द लिखा हर बार
जिसे तुमने मान लिया
कविता |
मेरे दर्द को 
तुमने कविता बना दिया !
-तुम्हारा कवि

Tuesday, January 12, 2016

टार चिरैया - घुंघरू परमार की एक कविता

ओ, टार चिरैया
कहाँ से सीखा, टाट पर यूँ
गणितीय ग्राफ में बैठना..
आसमां में गोल-गोल उड़ते हुए
'पाई चार्ट' बनाना
शाम को घर लौटते हुए
'ट्रेंगल' भी बनाना।
टार चिरैया ने कहा- गुनगुन
सदियों से हम उपेक्षित,असभ्य, कुरुप, गंवार हैं
ना मिला कभी 'प्रवासी पक्षी' बनने का सौभाग्य।
लोग भी उन्हें खरीद ले जाते अपने घरों में,
जो चिरैया रंगीं हो लाल, पीले,नीले रंगों में।
हम तो साक्षी हैं
इस टाट पर बैठकर
अगिणत किसानों के आत्महत्या के...
काम-देवता के भयानक कुकृत्यों के...
प्रेमियों के प्रेम के...
खाप-सज़ा भुगतने वाले जोड़ियों के...
उस मचान पर बैठकर बतियाती उन छोरियों के,
जो वर्षों बाद मायके लौटी हैं,घरेलू-हिंसा से थककर।
हम साक्षी हैं
फसल पकने से कटने तक के,
सुबह के, शाम के,
सूरज और चाँद के।
हम ऐसे गवाह हैं,
जो सैकड़ों कांड के साक्षी हैं।
यदि हो कोई ऐसी अदालत
तो ले चलो वहां...
हम नहीं बदलेंगें
अपना बयान।
मेरा गणित फिर से कमजोर कर दिया,
'टार चिरैया' ने।


Monday, December 14, 2015

हमारे प्रेम ने एक कर दिया धर्म पर लड़ने वालों को

क्रूरता अपने चरम पर है
और सत्ता शामिल है क्रूरता के इस चक्रव्यू में
ऐसे हम दोनों मग्न हैं प्रेम में
जल्द ही ज़ारी किये जाएँगे फ़तवे हमारे खिलाफ़
खाप इंतज़ार में था हमारे प्रेम के लिए
बहुत दिनों से खाली पड़ी थी उनकी बैठक
और हम गर्व महसूस कर रहे हैं अपने प्रेम पर
देखो, बर्दस्त नहीं उन्हें हमारी ख़ुशी
पंडित और मौलाना हाथ मिला रहे हैं
हमारी मौत की साजिस में
उनकी साज़िस में शामिल हैं हमारे अपने भी
हमारा प्रेम ही उनकी एकता है
और इसलिए मैं खुश हूँ
कि हमारे प्रेम ने एक कर दिया धर्म पर लड़ने वालों को
और इसलिए अब मुझे भय नहीं लगता प्रेम में
मरने से ......
यूँ ही ...तुम्हें सोचते हुए

Monday, December 7, 2015

तुम्हारे सब कुछ में कहीं मेरा नाम नहीं

तुम्हारा सब कुछ
सिर्फ तुम्हारा है
और तुम्हारे सब कुछ में
कहीं मेरा नाम नहीं
सब कुछ से अलग
जो तुम हो
वो मेरा है
मैंने तुम्हें अपना माना
यही मेरा अपराध है