नोटों से बनी माला

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती जी की एक तस्वीर प्रकाशित है अंग्रेजी दैनिक " द टाइम्स आफ इंडिया " में . इस तस्वीर में उन्हें उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनोऊ में आयोजित एक रैली में हजार रुपए के नोटों से बनी एक बहुत विशाल माला पहनाया जा रहा है . अनुमान लगाया गया कि इस माला में दो से पांच करोड़ रुपए होंगे . जिस देश में लोग आज भी सडको पर सोते हैं , कुपोषण से बच्चे मरते हैं उस देश में नेता प्रथम श्रेणी में हवाई यात्रा करते हैं और करोड़ों रुपए कि नोटों से बनी माला पहनते हैं.
जिस जनता के समक्ष यह लोग माला पहनते हैं उनके पास धागा पहनने के लिए भी पैसे नहीं है . देश का कितना पैसा विदेशी बैंकों में है यह कह पाना कठिन काम है, किन्तु देश के नेताओं के पास कितना पैसा है यह हम जानने लगे हैं. यह वही नेता है जो आज़ादी के बाद से भारतीय जनता को मुर्ख बना कर राज भोग का आनंद ले रहे हैं . यह अपने करोड़ों रुपए को देश का रूपया नही मानते . मंदी के दौर का भ्रम फैला कर करोडो रुपए से स्मारकों और पार्कों का निर्माण किया जा रहा है , माला पहना जा रहा है , गुमराह करने के लिए महिला आरक्षण बिल पर जनता को भटकाया जा रहा है . यह सामंतवाद है .
सरकारी अस्पतालों में योग्य डाक्टरों के होने के बाद भी लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज के लिए भागना पड़ता है . किउन? सरकारी विद्यालयों के बच्चे निजी विधालयों के छात्रों से कमजोर किउन ? क्या वहां के शिक्षक काबिल नहीं होते ?
रुसी और फ़्रांसिसी क्रांति को लोग भूल गये हैं . कारण है कि हमे आज़ादी दी गयी है हमने उसे हासिल नहीं किया था. आदमी का स्वभाव है वह मुफ्त में मिली वस्तु की कद्र नहीं करता. हेलेन केलर ने भी इस बात को अनुभव किया था. इस देश देश में सरकार बदलने के साथ ही इतिहास के पाठ्यक्रम बदल जाते हैं. लालबहादुर शास्त्री कैसे मरें? हम नहीं जानते , नेताजी सुभास का हवाई जहाज कहाँ गिरा था ? किसी को नहीं मालूम आजतक. क्या मेरा देश इसलिए महान कहलाता है ?

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