उन्होंने कहा - देशद्रोही मुझे

मैंने पढ़ी थी 
सिर्फ एक कविता 'विद्रोही ' कवि की 
'बलो वीर '

उन्होंने कहा -
देशद्रोही मुझे 

मुझे आई हंसी 
और उन्हें क्रोध ....

Comments

Popular posts from this blog

तालाब में चुनाव (लघुकथा)

टार चिरैया - घुंघरू परमार की एक कविता

दिन की मर्यादा रात ही तो है