लूट का पदक जीतते रहो.

अब लगता है राजघाट छोड़ कर
बापू को फिर से 

आना पड़ेगा
एक और असहयोग आन्दोलन के लिए
लातों के भूत बातों से नही मानते
सच है
...गाँधी ने देखा तुम्हे करीब से
परख कर दुखी होकर चले गये
तुम्हे छोड़कर
तुम्हे शर्म न आई
अब कहाँ है पीर पराई
.यूंही देश को लूटते रहो
सबको पीछे छोड़ते रहो
खेल न सही
लूट का पदक जीतते रहो.

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