जय की जय जयकार

गुलज़ार लिखते हैं जय हो

किन्तु किसकी जय हो

रहमान करें
...
जय की जय जयकार

दिल्ली के मंच
जय हो की धून पर
नाचती है शीला
गुलज़ार की जय हो को
यह कैसा शीला मिला
दिल्ली जल मग्न है
कलमाड़ी, शीला, मनमोहन, सोनिया आदि -आदि
सब एक संग है
यह कैसा बदरंग है
दिल्ली का कुत्ता
कितना भग्यवान है
खेल गावं के
अपार्टमेन्ट में
आजकल सो रहा है
उसी दिल्ली में  आदमी
सड़क पर
और सडक पानी में डूबा हुआ है .

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